रणनीति – अनु महेश्वरी

हम पड़ोसी बदल नहीं सकते,पर पड़ोसी जैसी भाषा समझे,वैसे ही उसे जबाब दे सकते है|एकबार सिख गए देना ज़बाब,पड़ोसी भी, सुधर जाएंगे तब,कोई हल्की बात करने की,फिर से हिमाकत नहीं करेंगे|मालूम है, अहिंसा अच्छी होती है,पर अन्याय सहते रहना भी,कहाँ बहादुरी कहलाती है ?मारे थप्पड़, अगर एक गाल पे,तो गाल दूसरा, आगे करने का,समय अब नहीं है, किया वैसे,सब फिर, कायर ही समझगें|इसलिए सही रणनीति को अपनाते हुए,जिसको जिस भाषा में, समझ में आए,उसी भाषा में, उसको ज़बाब दिया जाए| अनु महेश्वरीचेन्नई

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12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 05/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  3. mani mani 05/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  6. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 08/05/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 08/05/2017

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