धीरे धीरे – राकेश आर्यन

हर रुख से पर्दा हट रहा है अब धीरे धीरेकहानी में यूँ रंग बदल रहा है अब धीरे धीरेरिश्ते एहसासों को खरीदा बेचा जाएगा अब यहांज़रा ठहरो ये बाज़ार गर्म हो रहा है अब धीरे धीरेनाम वालों से सीखा था यहांनाम करने का तरीकापर नाम वाला ही बदनाम हो रहा है अब धीरे धीरेलफ़्ज़ों के जाल में फसा है हर कोई यहाँ परहोश में आओ ज़राहर शब्द हथियार बन रहा है अब धीरे धीरेजो वक़्त थम गया था यारों की यारी मेंवक़्त की खुमारी में बेकशी में बेकरारी मेंवो वक़्त भी चल पड़ा है अब धीरे धीरे …

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 05/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/05/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/05/2017
  4. mani mani 05/05/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 05/05/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma bindeshwar prasad sharma 05/05/2017

Leave a Reply