इक भूल – बी पी शर्मा बिन्दु

  जब सपने आये ऑखों मेंतो नीन्द खुली थी रातों मेंवो सपना तो इक सपना थाजो भीज गये बरसातों में। इक भूल हुई जो प्यार कियाबिन समझे आंखे चार कियाबदले में दिल का दर्द दियाबिन मतलब ये कर्ज लिया। मतलब का यार याराना थाये पागल मजनू दिवाना थाअब छोड़ो भी इन भूलों कोबस देखो अपने उसूलों को। यह दुनिया इतनी जालिम हैजैसे कुछ इसमें सामिल हैयहॉ पग पग पर ही धोखा हैयहॉ किसको किसने रोका है। वह दिल में बसने आती हैपर मन को ड़ंस के जाती हैकुछ ऐसे भी मिल जाते हैजीवन में फूल खिल आते हैं। बी पी शर्मा  बिन्दु  

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17 Comments

  1. डी. के. निवातिया 03/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 03/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 03/05/2017
  3. ANJALI YADAV 03/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 03/05/2017
  4. bindeshwar prasad sharma 03/05/2017
  5. Meena Bhardwaj 03/05/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 04/05/2017
  6. ANU MAHESHWARI 03/05/2017
    • Bindeshwar Prasad sharma 04/05/2017
  7. Madhu tiwari 03/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
  8. babucm 04/05/2017
    • bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 05/05/2017
  9. mani 05/05/2017
    • Bindeshwar prasad sharma 05/05/2017

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