वक्त का अनुभव

मै अनजान थी,उस वक्त ,जब मेरी कलम चल गयी मै अनजान थी जब मेरे ,कुछ शब्द एक कविता बन गयी. थी मै अनजान अपनी मंजिल से ,शायद उस वक्त मेरे सपनो की हवा चल गयी .है ये शब्द उम्मीद मेरे लिए ,क्योकि मेरे दर्द की ताकत बन गयी .था मेरे पास एक अकेलापन .लेकिन अब मेरी कविता,मेरी दोस्त बन गयी.चलती थी ऐसे ही कभी ,इन्ही रहो में ,पर आज यही रहे मेरे पंक्तियों ,में उतर गयी ..होगा कोई जो सजायेगा,मेरी हर इन्ही पंक्तियों को ,बस ये सोचकर ये राहे , मेरे दिल की दुआ बन गयी .anjali yadav

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14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 02/05/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017
  5. C.M. Sharma babucm 02/05/2017
    • अंजली यादव anjali yadav 02/05/2017

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