मैं गीत तुम्हारा बन जाऊँ

मैं गीत तुम्हारा बन जाऊँ चाह रहा है मेरा जीवनमैं गीत तुम्हारा बन जाऊँसाथ मिले गर दो पग भी तोमैं मीत तुम्हारा बन जाऊँ हैं साँसें बिखरी अक्षर-सीसमेट रहा है जिनको जीवनकुछ टूटी हैं आस जगातीजिससे आगे बढ़ता जीवन छन्द-बद्ध कर यह सब आशालय में तेरी मैं भी लाऊँचाह रहा है मेरा जीवनमैं गीत तुम्हारा बन जाऊँ मंदिर में बन तेरी प्रतिमाजग में पत्थर पूजे जातेहैं पत्थर-दिल कई यहाँ परपरिभाषित पीड़ा कर जाते इस पीड़ा के कंकड़ सारेहृदय-कलश में भर भर लाऊँचाह रहा है मेरा जीवनमैं गीत तुम्हारा बन जाऊँ  हैं आँधी के दौर बहुत सेकब तक दीपक ज्योत बचायेनाव बिचारी खड़ी किनारेतुझे पुकारे, मुझे बिठाये  तुझे बुलाने साँसें कहतीमैं आँधी बन उड़कर जाऊँचाह रहा है मेरा जीवनमैं गीत तुम्हारा बन जाऊॅ नन्हे से दो पग झुलसानेझुलस रहीं हैं राहें कब सेदो पग का यह सफर अनोखाढूंढ़ रहा है तुझको कब से   साया तेरी पाकर अद्भुतमैं पास तुम्हारे आ जाऊँचाह रहा है मेरा जीवनमैं गीत तुम्हारा बन जाऊँ।—-      ——-     —-      भूपेंद्र कुमार दवे 00000  

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6 Comments

  1. babucm 02/05/2017
  2. ANU MAHESHWARI 02/05/2017
  3. Madhu tiwari 02/05/2017
  4. bindeshwar prasad sharma 02/05/2017
  5. डी. के. निवातिया 02/05/2017

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