प्रेम मोल….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

II छंद – उल्लालाIIकान्हा नयन बह रहे, सुदामा चरण धुल रहे Iनिर्मल छवि ये देख के,सब लोक धन्य हो रहे IIप्रेम मोल अनमोल है, जो प्रेम ही आंक सके Iतंदुल में मोहन बिके, जो त्रिलोक न तोल सके II\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 01/05/2017
    • babucm 02/05/2017
  2. Shishir "Madhukar" 01/05/2017
    • babucm 02/05/2017
  3. डी. के. निवातिया 01/05/2017
    • babucm 02/05/2017
  4. Madhu tiwari 01/05/2017
    • babucm 03/05/2017
  5. Bindeshwar prasad sharma 01/05/2017
    • babucm 03/05/2017
  6. Meena Bhardwaj 01/05/2017
    • babucm 03/05/2017
    • babucm 03/05/2017
  7. mani 01/05/2017
    • babucm 03/05/2017
  8. Kajalsoni 26/05/2017
    • babucm 26/05/2017

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