ब्रम्ह्मुहूर्त -आनन्द

आज फिर रॉनी का ब्रम्ह्मुहूर्त मे उठने का सपना अधूरा रह गया आज फिर वो ७ ब्जे सो के उठा ,सारी दैनिक क्रियाओं के उपरान्त वो दफ़्तर के ळिए निकला, गली मे एक ई-रिक्शा वाला आवाज़ दे रहा था , रॉनी उसे रॉयल इग्नोर करते हुए चला गया, ये ई- रिक्शे वाले भी कितने धैर्यवान होते हैं जब इनका रिक्शा खाली होता है कोई इन पर आसीन होना नही चाहता..और ये बात ये रिक्शे वाले बखूबी समझते हैं तभी तो वो अपने लोगों को पहले से बिठा कर रखते हैं सवारी को झांसा देने के लिए…इस बात से रॉनी वाकिफ़ था..बहरहाल वो चल रहा था तभी एक नागरिक उसके सामने दिखा जो अजीबोगरीब तरीके से सड़क पर चल रहा था, असल मे इस प्रजाति के पुरुष अथवा स्त्री हर जगह ठीक ठाक मात्रा मे पाए जाते हैं ,बात गौर करने वाली थी वो आदमी सड़क के हर कोने मे जाने की कोशिश कर रहा था अपितु उसे आपेक्षित सफलता नही मिल रही थी फिर भी वह निरंतर लगा हुआ था, रॉनी मन ही मन उसके लिए कई असंसदीय शब्दों का चुनाव कर रहा था …अंततः रॉनी इस अघोषित प्रतियोगिता मे जीत गया और नुक्कड़ पर तैयार एक ई-रिक्शे मे जा कर बैठा जिसमे मात्र एक सीट खाली थी.

(आनन्द)

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3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 29/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 29/04/2017

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