हवा कहूँ या तेरा नाम लूँ – राकेश आर्यन

खोले अपनी बाँहें..यूँ चलती रही हवाएंना शोखियों का होश थाना रवानी का जोश थाउसे उड़ने का शौक थान डूबने का ख़ौफ़ थासिर्फ चलना उसकी क़ज़ा में थामंज़िलों का कुछ पता ना थाकुछ गीत वो गाती रहीकुछ गीत वो सिखाती रहीकभी बहती रही और सिर्फ बहती रहीकभी बहती रही और बहाती रहीअंजाम क्या है किसे पताजिसे पता है वो है लापतातो उड़ चलो तुम भीथोड़ी धूल उड़ाते हुएजो सिख लिया तुमने हवाओं सेवो सबको सिखाते हुए।

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20 Comments

  1. Vibha 27/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" 27/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI 27/04/2017
  4. babucm 28/04/2017
  5. kiran kapur gulati 28/04/2017
  6. डी. के. निवातिया 28/04/2017
  7. bindeshwar prasad sharma 28/04/2017
  8. Kajalsoni 28/04/2017
  9. Saviakna 29/04/2017

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