इस जग में तो धन ही बल है

जिससे कूजित कलयुग कल -कल है इस जग में तो धन ही बल हैजीवन-संचारी ये रक्त है इसके बिन हर जीव मृतक है वही स्थिति धन-हीन मनुज की जल बिन यथा जल्द निर्जल है इस जग में तो धन ही बल हैइसका लोभी बन कर मानव हो जाता है निश्चय दानव मानव को मानवता से च्युत कर सकने में यही सबल है इस जग में तो धन ही बल हैइसके हेतु सभी रिश्ते हैं इस के खातिर सब बिक सकते हैं कोई बली नहीं इस जैसा इसके सम्मुख सब निर्बल हैं इस जग में तो धन ही बल हैलक्ष्मी का यह अपर-रूप है माया का यह अंध – कूप है इससे निकल न सकता कोई लोभ -मोह का यह दल-दल है इस जग में तो धन ही बल हैबन बैठे इसके चेरे हम नाचें सब जगती मरकट बन कोई कर ही क्या सकता, जब मानव-मन ही चंचल है इस जग में तो धन ही बल है

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 24/04/2017
  2. raquimali raquimali 24/04/2017
    • डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल' Dr SUSHIL UPADHYAY 'VIMAL' 26/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/04/2017
    • डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल' Dr SUSHIL UPADHYAY 'VIMAL' 26/04/2017
    • डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल' Dr SUSHIL UPADHYAY 'VIMAL' 26/04/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/04/2017
    • डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल' Dr SUSHIL UPADHYAY 'VIMAL' 26/04/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/04/2017
    • डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल' Dr SUSHIL UPADHYAY 'VIMAL' 26/04/2017
  6. Kajalsoni 27/04/2017

Leave a Reply