कहाँ से लाऊँ ढूंढ के…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

घर था कभी जो अब मक़ान हो गया…ज़िंदा लाशों का वो शमशान हो गया….कच्चे घरों में आती थी रिश्तों की खुशबू…पक्के क्या हुए सब सुनसान हो गया….बरगद के पेड़ तले, फले फूले सभी मगर…ताड़ क्या हुए बरगद ही मेहमान हो गया…थी दिलो में रंजिशें मगर ऐसी ना थी कभी….के दूध के कर्ज को भी मन बेईमान हो गया….रहा दौरे मुफलिसी बेशक पर बरकतें भी थीं….छुआ जो आसमान तो सब वीरान हो गया…कहाँ से लाऊँ ढूंढ के अब वो रिश्ता वो दिल….हो फख्र जिसपे के प्यार पे कुर्बान हो गया….खोजा बहोत ‘चन्दर’ मगर मिला नहीं वो नश्तर…चीर डालूँ जिससे दिल जो ज़हरे मकान हो गया….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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28 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 22/04/2017
    • babucm 16/05/2017
  2. bhupendradave 22/04/2017
    • babucm 26/05/2017
  3. Rajeev Gupta 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  4. डी. के. निवातिया 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  5. Rajeev Gupta 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  6. Kajalsoni 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  7. ANU MAHESHWARI 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  8. Meena Bhardwaj 22/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  9. bindeshwar prasad sharma 23/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  10. mani 23/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  11. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/04/2017
    • babucm 24/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  12. anjali yadav 24/04/2017
    • babucm 24/04/2017
  13. Bhawana Kumari 17/07/2017
    • babucm 18/07/2017

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