ग़ज़ल- बहे अश्क यूँ दर्द के आज आँखों से मेरी…मनिंदर सिंह “मनी”

बहे अश्क यूँ दर्द के आज आँखों से मेरी |लिया कर किनारा हो तुमने अदाओ से मेरी ||सजी मेरी महफ़िल सनम सिर्फ तेरे लिये ही |लगे बेखबर तुम मुझे आज बातों से मेरी || बताओ बदल से गये हमसफ़र कैसे तुम यूँ | नज़र को मिलाते नहीं तुम निग़ाहों से मेरी ||कहो कुछ लबो से मेरे हर ख़ुशी क्यों चुरा ली |कमा ली दगा क्यों सनम तुम ने साँसो से मेरी ||भुला जग के दस्तूर तुझ को ही चाहा हमने | न खेलो “मनी” और तुम यूँ वफाओ से मेरी || मनिंदर सिंह “मनी”

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20 Comments

  1. babucm 20/04/2017
    • mani 23/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" 20/04/2017
    • mani 23/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI 20/04/2017
    • mani 23/04/2017
    • mani 23/04/2017
  4. Bhawana kumari 20/04/2017
    • mani 23/04/2017
  5. kiran kapur gulati 20/04/2017
    • mani 23/04/2017
  6. Rajeev Gupta 21/04/2017
    • mani 23/04/2017
  7. Meena Bhardwaj 21/04/2017
    • mani 23/04/2017
  8. डी. के. निवातिया 21/04/2017
    • mani 23/04/2017
  9. Kajalsoni 22/04/2017
    • mani 23/04/2017

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