सुनो मेरी माँ

माँ बाहर कुछ अच्छा नहीं लगता ,अपने अंदर छुपा लो न माँ .माँ मत जोड़ो अब कोई रिश्ते ,सारा संसार बेगाना है माँ .तेरी परछाई बन कर भी रोती हू,अब अपने दिल में समा लो माँ .ये आंखे थक गयी है अब ,रोना नहीं चाहती माँ .फिर भी अपने आंसू ,हमको दे दो माँ ..ये आंखे अब सोना नहीं चाहती ,लेकिन अब तू सो जा मेरी माँ ..जानती हू मै नहीं रह सकती तेरे बिन ,फिर भी एक दिन रहना पड़ेगा माँ .ये रिश्ते ये नाते ,सब झूठे है माँ ,एक तू ही मेरे लिए रोती है माँ ..डर लगता है दुनिया की भीड़ में मुझे ,अपने से कभी दूर न कर माँ .दुनिया की भीड़ मुझे ,पहचान न पाई ,मेरे हर दर्द से तू ही ,वाकिफ है मेरी माँ ..                सिर्फ तू मेरी माँ …           

                                                                    अंजली यादव

                                                                      KGMU {LKO}

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7 Comments

  1. mani mani 19/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/04/2017
  3. C.M. Sharma babucm 19/04/2017
  4. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 19/04/2017
  5. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/04/2017
  6. Kajalsoni 22/04/2017

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