भूल न जाना तुम मेरे गीत

भूल न जाना तुम मेरे गीत जब नव ऋतु गीवें तेरे गीतभूल न जाना तुम मेरे गीत तेरे गीत हैं मधुमास भरेमेरे गीत बस एक पँखुरीतेरे संग आँधी का आलममेरी तो एक साँस अधूरी पँख फैलाये फुदक फुदक करजब खगगण गावें तेरे गीतभूल न जाना तुम मेरे गीत गरज रहे हैं मेघ तुम्हारेबिजली लिये कंपन का सुर हैपर प्राण है इकतारा मेराकंपित साँसों का कंचित सुर है कोयल गाती गीत तुम्हारेचुपचुप सुनकर वह मेरे गीतभूल न जाना तुम मेरे गीत तू गीतों में भरता चिर-यौवनचिर-पिपासा की लेकर सरगमगाकर गीत तू अमर हुआ हैमुझे दिया है मृत्यु-भय हरदम समझा जिसे तू पीड़ा सागरवह गागर है मेरा ही गीतभुल न जाना तुम मेरे गीत सारी प्रकृति वाद्यवृंद तेरीमेरे हिस्से इक खाली ठोलगठरी खाली ठोल समान हैचले साथ बन है ठठरी अनमोल मेरी अर्थी लिये काँधों परचुपचाप चले जब मेरे मीतभूल न जाना तुम मेरे गीत।—-      ——-     —-      भूपेंद्र कुमार दवे00000 

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/04/2017
    • bhupendradave 18/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 18/04/2017
    • bhupendradave 18/04/2017
    • bhupendradave 18/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/04/2017
    • bhupendradave 18/04/2017
  4. ALKA ALKA 19/04/2017
  5. Kajalsoni 21/04/2017

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