बयानबाज़ी – अनु महेश्वरी

कभी कभी सोचती हूँ,क्या कोई इंसान जन्म से बुरा होता होगा?कोई भी जन्म से बुरा, सायद नहीं होता है,लगता है, परिस्थितियां इंसान को बुरा बना देती है,और कोई कोई बुराई की हदों को पार कर जाते है|मुश्किलें तब और भी बढ़ जाती है,जब आए दिन,बेतुकी और संवेदनशील बयानबाज़ी होने लगती है|कभी कभी मन मेरा कचोटता है,पापी से नफ़रत करें हम, या उसके पाप से,क्योंकि किसी के लिए भी, बहुत आसान है,इशारा करना दुसरो पे|अक्सर हम बहुत जल्दबाज़ी में जो रहते है,अपना फैसला सुनाने में|बहुत आसान है, आलोचना करनी किसी की भी,परन्तु जब तक हम, उनकी ज़िन्दगी जिएंगे नहीं,मुश्किल है, समझ पाना उनकी पीड़ा को भी,किस हालात से वह गुज़रे होंगे, या गुज़रते होंगे रोज़ ही,यह, बाहर से अंदाज़ा लगाना मुमकिन नहीं है,क्योंकि खुद जब तक अंगारो पर चलेंगे नहीं,उसकी तपत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है|यह भी सही है,हम सभी अपनी अपनी ज़िन्दगी में,कही न कही उलझे हुए से है,तब एक काम तो, हम सभी कर ही सकते है,बिना सोचे समझे, अनावस्यक ही हर घटना में,अपनी प्रतिक्रिया देना बंद करे हम|ताकि, अगर समस्याओ को सुलझा न सके हम,अपने बेतुके बयानों से, उन्हे उलझाए भी न हम| अनु महेश्वरीचेन्नई

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16 Comments

  1. डी. के. निवातिया 17/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI 17/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  4. babucm 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  5. mani 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  6. shivdutt 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  7. Meena Bhardwaj 18/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/04/2017
  8. Kajalsoni 21/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 21/04/2017

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