“राह में अकेले चल के तो देखो “

राह में अकेले चल के तो देखो ,अपने ऊपर आने वाले मुसीबतों को हल कर के तो देखो !मुक्कदर भी अपना रास्ता बदल देगा, जरा इन मुश्किलों को हल करके तो देखो !!मुझे मिला है तुझे मिला है, मिला है ये सरे जहाँ को, ये मुश्किलों का दौर किसी से ना अनछुआ है !जिसने भी इन मुश्किलों को ना छुआ है, वो फिर ज़माने से कहाँ रूबरू हुआ है !!क्योंकी मुश्किलों के बाद ही तो जीवन का सच खड़ा है !ये मुश्किल ही तो है जिसने हम सबको अपनी अपनी मंजिल से मिलने ना दिया है !!ये हमारी बदनसीबी नहीं जो हमको हमारी मंजिल से मिलने ना दिया है !ये तो हमारी कमजोरी है जिसने हमको अलसी बना दिया है !!वरना परिश्रम तो वो हिरा है मेरे यारों जिसने पर्वतों में भी अपना रास्ता बना लिया है !इन मुश्किलों के दौर में श्रम का सहारा ही साथ दिया है !!इन मुसीबतों को हंस खेल के पार कर जाओ, अपने श्रम से तुम अपने आप को इस काबिल बनाओ, मुश्किल से भरे चट्टानों को भी तुम पिघलाओ, अपने मुकद्दर का सिकंद्दर तुम भी बन जाओ !!अपनी मंज्ज़िल को तुम पाओ, अपने रस्ते तुम खुद बनाओ, अकेले ही राह में चलते जाओ धरती से आसमा तक फतेह लहराओ, राह में अकेले चलते जाओ !!लेखक श्रीकांत मिश्रा

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5 Comments

  1. Kajalsoni 16/04/2017
    • Er. Shrikant Mishra 17/04/2017
  2. mani 16/04/2017
    • Er. Shrikant Mishra 17/04/2017
  3. babucm 17/04/2017

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