ग़ज़ल-छलकता अश्क आँखों से लिये खुद में कहानी है–मनिंदर सिंह “मनी”

छलकता अश्क आँखों से लिये खुद में कहानी है | कहीं दिल की तड़प सा तो कहीं ये सिर्फ पानी है || कभी दिल में सजे सपनो को पूरा कर बहे यूँ ही |दुआ बन निकले आँखों से ख़ुशी की ये निशानी है ||दिखे दिलबर के चहरे पर वफ़ा की छाप सी बन कर |जला दे अश्क आँखों को करे गर दिल बदगुमानी है ||घरौंदे है जले हर रोज नफरत की ज्वाला में | जमाना भी करे हर बात अश्को की जुबानी है ||करे विनती कभी आगे खुदा के अश्क सब के ही |बहे जो अश्क झूठे ही वो बेमानी की निशानी है ||मनिंदर सिंह “मनी”

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 15/04/2017
    • mani mani 15/04/2017
  6. Kajalsoni 16/04/2017
    • mani mani 16/04/2017
  7. C.M. Sharma babucm 17/04/2017
    • mani mani 17/04/2017

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