मेरा दाम हो गया -शिशिर मधुकर

उनसे मैं जुड़ गया तो मेरा नाम हो गया हर पल उन्हें मनाना मेरा काम हो गयाबारूद का मैं ढेर था सिमटा हुआ पड़ाशोला जो पास आया ये अंजाम हो गया किसकी मजाल थी मेरी कीमत को तय करे उल्फत की राहों में मगर नीलाम हो गया इतना नशा दिखा मुझे उनके शबाब में लब से जिसे भी छू लिया वो जाम हो गया माना उन्होंने मुँह से कुछ भी नहीं कहा पलकों का झपकना ही बस पैगाम हो गया मुझको ज़माने भर ने पत्थर बना दिया छुआ मुझे उन्होंने तो मेरा दाम हो गया शिशिर मधुकर

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20 Comments

  1. डी. के. निवातिया 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  3. babucm 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  4. Meena Bhardwaj 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 13/04/2017
  5. arun kumar jha 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/04/2017
  6. kiran kapur gulati 13/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 14/04/2017
  7. Kajalsoni 14/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2017
  8. mani 15/04/2017
    • Shishir "Madhukar" 15/04/2017

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