ग़ज़ल ( इस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहे)

कभी गर्दिशों से दोस्ती कभी गम से याराना हुआचार पल की जिन्दगी का ऐसे कट जाना हुआइस आस में बीती उम्र कोई हमें अपना कहेअब आज के इस दौर में ये दिल भी बेगाना हुआजिस रोज से देखा उन्हें मिलने लगी मेरी नजरआँखों से मय पीने लगे मानो कि मयखाना हुआइस कदर अन्जान हैं हम आज अपने हाल सेमिलकर के बोला आइना ये शख्श दीवाना हुआढल नहीं जाते है लब्ज ऐसे रचना में कभीकभी गीत उनसे मिल गया ,कभी ग़ज़ल का पाना हुआमदन मोहन सक्सेना

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7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 13/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 13/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 13/04/2017
  4. C.M. Sharma babucm 13/04/2017
  5. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 13/04/2017
  6. Kajalsoni 14/04/2017
  7. mani mani 15/04/2017

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