करो प्रेम का तुम इक़रार,,,,,

मेरे साजन तुझ भी बिन देखो कैसे मैं कुम्हलाई हूँरंग नहीं है मुझपर कोई बस काली एक परछाईं हूँआकर मेरा रूप निखारोकरो प्रेम से तुम श्रृंगार बाहों में भरकर के मुझकोकरो प्रेम का तुम इक़रार,,,,,होंठो के तेरे चुम्बन से मेरे माथे की बिंदियाँ बन जायेतेरे प्रेम की उज्ज्वल काया सेमेरा श्यामल तन खिल जायेतेरे प्यार में भीगा ये मनकरता तुझसे इज़हार बाहों में भरकर के मुझकोकरो प्रेम का तुम इक़रार,,,,, जैसे दीपक के आलिंगन मेंजलती बाती भी इठलाती हैभंवरे के चुम्बन से जैसे हर कली-कली मुस्काती हैऐसे ही तेरी एक छुअन सेरच उठता मेरा संसार बाहों में भरकर के मुझकोकरो प्रेम का तुम इक़रार,,,,, मेरा तुम श्रृंगार प्रिये जीवन का तुम मनुहार प्रियेतुम बिन मेरी न कोई परिभाषातुम हो मेरी नज़रों की भाषाअब तो आओ मेरे साजन पढ़ लो फिर से मेरा ये मनविरह अग्नि अब तड़पाती हैअँखियाँ अँसुअन से भर जाती है नहीं किसी से मुझको प्यारअँखियों में है बस तेरा इंतज़ारबाहों में भरकर के मुझकोअब करो प्रेम का तुम इक़रार,,,,, ।सीमा “अपराजिता “

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15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
  2. डॉ. विवेक 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
  3. डी. के. निवातिया 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
  4. Madhu tiwari 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
  5. babucm 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
  6. Kajalsoni 12/04/2017
  7. Kajalsoni 12/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017
    • सीमा वर्मा 26/04/2017

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