हृदय हमारा फुलवारी है

हृदय हमारा फुलवारी हैफूल हमारे सत्गुण हैं।काँटे जैसे चुभते सबकोवो कहलाते अवगुण हैं।रंग हमारा अलग अलग हैमहक सभी मनमोहक हैहर कलियों को छूकर देखोकोमल सबका तन मन है।चुन चुनकर सुन्दर फूलों कोजब कर्म हमारे गुँथते हैंकर्म हमारे अंतर्मन कासृजन हमेशा करते हैं।धर्म कर्म के इन फूलों सेमाला मोहक बनती हैइसे समर्पित तुझको करकेश्रद्धा प्यारी जगती है।तुझे नमन करने हम सब जनहृदय सजाया करते हैंऔर स्मरण जब तेरा करतेअवगुण सत्गुण बनते हैं।तेरी मूरत प्यारी न्यारीजब फूलों से सजती हैतब मानव की फुलवारी भीकर्मफूल से सजती है।हृदय हमारा फुलवारी हैफूल हमारे सत्गुण हैं।काँटे जैसे चुभते सबकोवो कहलाते अवगुण हैं।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

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7 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 11/04/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/04/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/04/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/04/2017
  5. Kajalsoni 11/04/2017
  6. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/04/2017

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