कविता–मौज वह बचपन की, कवि- अमन नैन

मौज वह बचपन कीबडी न्यारी थीहोती सायं बडी प्यारी थीसुबह स्कूल दोस्तो के साथ जाते थेगलियो मे किलकारी मारते रहते थेलेकर बहाना पेट दर्द कास्कूल भाग आते थेबनाकर टोलिया नहानेतालाब जाते थेऔर आ कर मॉ सेमार खाते थेखेलते खेलते दोस्तो केघर सो जाते थेफागन के महीने मेतितलियो के पीछे दौडते रहते थेपापा के लाए खिलौनो कोसबको दिखते थेआ गई जवानी कैद हो गयाबचपन बंद कमरो मेक्यो पैसो के चक्कर मे’अमन’ भूल अपने बचपन कोमौज वह बचपन कीबडी न्यारी थी

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. babucm 11/04/2017
    • Aman Nain 11/04/2017
  2. Madhu tiwari 11/04/2017
    • Aman Nain 11/04/2017
  3. डी. के. निवातिया 11/04/2017
    • Aman Nain 11/04/2017
  4. Kajalsoni 11/04/2017
    • Aman Nain 11/04/2017
  5. mani 12/04/2017
    • Aman Nain 24/04/2017

Leave a Reply to babucm Cancel reply