एक दोस्त था ऐसा

मेरी नयी कविता मेरे मित्र रामसागर जी को समर्पितजो अब इस संसार में नहीं रहे शीर्षक-एक दोस्त था ऐसाएक दोस्त था मेरा ऐसाजो निभाता था दोस्तीया ये कहूँ वो जीता था दोस्तीकट वाले शर्ट और पैन्टपैरो में चप्पलआँखों में चश्मायही तो थी उसकी पहचानइसी पहचान को बढ़ाने के लिएउसका रोज कॉलेज आनापुस्तकालय में बैठकिताब के पन्नो को पलटानाचश्मे को ऊपर की तरफ़ बार बार सरकानायही तो थी उसकी पहचानकक्षा में बैठपूछते रहना सवालऔर ढूंढते रहना जवाबएक दोस्त था मेरा ऐसाजो हमारा बनकर जीता था हमकोआज वो नहीं हैमेरी आँखे सजल होकरढूंढती रहती उसेदाहिने ओर की दूसरी बेंच परजहाँ बैठ वो पूरा करना चाहता थाअपना आधा अधुरा सपनाअपनी पत्नी के लिए बनाना चाहता था आशियानाअपने बच्चे के लिए खरीदना खिलौनामाँ की आँखों का इलाज़ करवानाएक दोस्त था मेरा ऐसानहीं जानता था वो वो था तो था उसकी पत्नी का आशियानावो तो खुद ही था अपने बेटे का खिलौनावो नहीं जानतावो था तो थी उसके माँ के आँखों में रौशनीएक दोस्त था मेरा ऐसाजिसके नाम में छिपा था ईश्वर का नामफिर क्यों उसे ले गयाऊपर हमसेवो ऊपर बैठा भगवान #अभिषेक राजहंस

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8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/04/2017
    • Abhishek Rajhans 11/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 11/04/2017
  3. Kajalsoni 11/04/2017
    • Abhishek Rajhans 11/04/2017
    • Abhishek Rajhans 11/04/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 11/04/2017
  5. mani mani 12/04/2017

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