“मन”

मानता ही नही मन,बस पीछे की ओर दौड़ता है ।पहली बारिश में‎ गिरी पानी की बूंदें,बूंदों की नमी चेहरे पे खोजता है ।धरती पे बिछी ओलों की चादर,गीली हथेली में‎ ठिठुरन को खोजता है ।मानता ही नही मन,बस पीछे की ओर दौड़ता है ।आँगन में झुकी आम के पेड़ की डाली,नई शाखों में पुरानी बौर ढूंढ़ता है ।मानता ही नही मन,बस पीछे की ओर दौड़ता है । ××××××××”मीना भारद्वाज”

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20 Comments

  1. डॉ. विवेक 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  2. Shishir "Madhukar" 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  3. डी. के. निवातिया 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  4. babucm 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  6. Kajalsoni 10/04/2017
    • Meena Bhardwaj 10/04/2017
  7. Madhu tiwari 10/04/2017
  8. Meena Bhardwaj 10/04/2017
  9. mani 12/04/2017
    • Meena Bhardwaj 12/04/2017
  10. ALKA 18/04/2017
    • Meena Bhardwaj 15/05/2017

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