सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता

सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। गर तू पतवार न बनतामैं क्यू नैया लेकर आताइस आँधी में तू ही आयामेरी नैया पार लगायालहरें आती हँसती जातीऔ उदास मैं होता रहता निर्जीव नाव लिया हुआ ही मैंबस बीच भँवर में तड़पा होता।सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। गर तू जग से रूठा होतानिष्ठुर बनकर बैठा होताकौन पूछता तुझे जगत मेंकौन तुम्हारी पूजा करतायही जानकर मैं तुझको यहपतवार हठीली दे आया तब तेरे बिन लाचार बना मैंबस बैठ किनारे लहरें गिनता।सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। गर तू मेरा साथ ना देतामैं पंखों में दम क्यूँ भरताउड़ता फिरता मुक्त गगन मेंपर मैं तुझको खोज न पाताखींच खींचकर तब पंखों कोतेरे कदमों ला धर जाता तब लौट किनारे तेरे सम्मुखबस किनारे रोता होता।सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। गर तू मेरा ध्यान न रखतामुझे तरसता व्याकुल रखताआखें मेरी आँसू पीतीतब व्यथित प्राण का क्या होतातेरा भवसागर भी यह तबआँसू पीता भरता रहता तब तेरी सृष्टि के भी हर कण मेंआँसू का इक कतरा-सा होता।सच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। गर तू मेरा दुख ना हरतामैं भी रोता तू भी रोतातेरे मेरे इन आँसू कासरगम कितना पीड़ित होतातेरे आँसू देख जगत केहर आखों बस आँसू होता तू भी मेरे जैसा पीड़ा मेंतड़प तड़पकर बस चीखा करतासच, तेरे बिन मैं कुछ ना होता। तू ना होता जग भी ना होता।मेरा भी यह जग सूना होता।….. भूपेन्द्र कुमार दवे00000 

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4 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 08/04/2017
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 09/04/2017
  3. C.M. Sharma babucm 09/04/2017
  4. Kajalsoni 09/04/2017

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