आग

वो रातों का पहर , वो शान्त समावो घड़ी कि सुई कि, टिक-टिक टिक टिकनशे में सोया सारा जहांफ़िर अचानक क्या हुआधुआँ ही धुआँ , धुआँ ही धुआँवो सब मगन , सब नींद मेंओर एकदम से ,बूम………ये अचानक क्या हुआधुआँ ही धुआँ , धुआँ ही धुआँवो तेज़ रोशनी , वो आग की लपटेओर दिल दहलाने वाला मंजरदिलो में हुई , धुक धुक धुक धुकये अचानक क्या हुआधुआँ ही धुआँ, धुआँ ही धुआँकिसी कि चिख़, किसी की पुकारइधर उधर भागना , दिलो का सहमनाओर ये मौत का मंजर देखकरआंखों में दया कि पुकारये अचानक क्या हुआधुआँ ही धुआँ, धुआँ ही धुआँवो अपनो का गम, वो अपनो का दर्दकुछ खोया, कुछ पायाकुछ जला, कुछ बचायाफ़िर ना आये ऐसा समाधुआँ ही धुआँ, धुआँ ही धुआँबरखा रानी

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3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 06/04/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 07/04/2017
  3. Kajalsoni 07/04/2017

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