नारी की अभिलाषा – अनु महेश्वरी

क्या साल में एक दिन,नारी दिवस मना कर,बाकी बचे हर रोज,उसकी अवहेलना करने से,आ पायेगा परिवर्तन समाज में?वैसे तो हम देवी को भी पूजते है,पर कितने घर होंगे,जहाँ आज भी नारी को,बोलने का अवसर मिलता है,या फिर बड़े फैसले लेने में,उनकी भी बात सुनी जाती है?हम आधुनिक हो चाहे कितने भी,पर सोच वही पुरानी सी अभी भी|आज भी अधिकांश घरों में,जहाँ वह पली बड़ी,अपना बचपन बिताया,शादी होते ही पराई,मान ली जाती है|अधिकांश घरों में आज भी,बेटियों पर ही पाबन्दी रहती है।यहाँ मत जाना,देर से मत आना|कितना डरते है हम,लोगो की सोच को,बदलने की जगह,जो उससे पीड़ित है,उसे ही कैद करना चाहते हम|दोष किस को दे?हम से ही तो समाज है|समाज का एक हिस्सा,अगर दब कर रहा तो,उनके साथ अनहोनी होती रहेगी|उन्हें स्वावलंबी और आत्मनिर्भर,बनाना अब जरुरी है|सबकी सोच को बदलने की भी,अब जरुरत है,जिससे समाज में बदलाव आए|बेटियों का मनोबल बढ़ाये, ताकिअपनी सुरक्षा वह खुद कर पाए|आत्मनिर्भर भी उसे बनाये, ताकिउसे बोझ न समझा जाए।अधिकारों से वह वंचित न रहे अब और,इस बात का ख्याल रखा जाए।नहीं चाहीए एक दिन का,स्पेशल ध्यान अब उसे,न ही कोई आरक्षण चाहिए|नारी को तो बस अब,और कोई भेदभाव नहीं,बराबरी का अवसर चाहिए|बराबरी का अवसर चाहिए। अनु महेश्वरीचेन्नई

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21 Comments

  1. डी. के. निवातिया 06/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
  2. babucm 06/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
  3. डॉ. विवेक 06/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
  4. Meena Bhardwaj 06/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
      • ANU MAHESHWARI 06/04/2017
  5. Madhu tiwari 07/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 07/04/2017
  6. Kajalsoni 07/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 07/04/2017
  7. Shishir "Madhukar" 07/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 07/04/2017
  8. sarvajit singh 07/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 07/04/2017
  9. mani 08/04/2017
    • ANU MAHESHWARI 08/04/2017

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