तन्हाई अच्छी है – अजय कुमार मल्लाह

ख़्वाहिश नहीं खुदा से मिलूं ये ख़ुदाई ही अच्छी है,बरकत-ए-इश्क़ दूरियों में है तो जुदाई ही अच्छी है, ग़मजदा होकर बिखरूँ अब हिम्मत नहीं रही मुझमें,महफ़िलों का शौक़ नहीं मुझे मेरी तन्हाई ही अच्छी है।

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18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/04/2017
  2. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 05/04/2017
  3. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 05/04/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 05/04/2017
  5. C.M. Sharma babucm 06/04/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/04/2017
  7. Kajalsoni 06/04/2017
  8. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 06/04/2017
  9. mani mani 08/04/2017

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