मेरी कलम 4 ……. काजल सोनी

हर तरफ से तन्हाई के गम ने मुझे घेरा था । हर तरफ से जुदाई के गम ने मुझे घेरा था । मैंने छोड़ दिये मुहब्बत में कुछ पाने की ख्वाहिश, और बंद आँखों में भी , एक उजला सवेरा था। दर्द इतना था मुझे कि बता नहीं सकती । प्यार इतना था मुझे कि जता नहीं सकती। वो भले ही मुझे लाख सताये , मगर मैं उनकी तरह उन्हें रुला नहीं सकती। दिये जो तुने दिल से बद्दुआ वो मुझे कुबुल हो गयी। दिये जो दर्द वो गम , वो भी मुझे कुबुल हो गयी। मै तुमसे कुछ और नहीं कहती , बस करके तुमसे बेइंतहा मुहब्बत, मुझसे एक भुल हो गयी। . . ” काजल सोनी “

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19 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 07/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 07/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  3. vinod sihag vinod sihag 08/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  4. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 08/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
      • Kajalsoni 08/04/2017
        • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/04/2017
          • Kajalsoni 08/04/2017
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  7. mani mani 08/04/2017
    • Kajalsoni 08/04/2017
  8. C.M. Sharma babucm 09/04/2017

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