दिल की बात – राकेश आर्यन

किसी गैर के किस्से सुनाता रहा तुमको।इसी बहाने दिल की बात बताता रहा तुमको।मेरी दिवानगी में थी कमी या तेरी बेपरवाहियां ज्यादातुझसे दूर होकर अपने क़रीब बुलाता रहा तुमको।किसी उम्मीद से बहोत दूर धूप में तपती छाओं की तरहज़मी को देखते हुए खुले आसमानो की तरहबड़ी मोहब्बत से अपनी मोहब्बत दिखता रहा तुमको।तू मुझमे है या मैं हूँ तेरे अंदरजैसे दरिया खुद मिल जाती ह या खींच लेती है उसे समंदर,इसी पहेली को सुलझाने की खातिरमन की बात बेज़ुबानी सुनता रहा तुमको।किसी बहाने से दिल की बात बताता रहा तुमको।

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6 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 03/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 03/04/2017
  3. Kajalsoni 03/04/2017

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