मैं और तू — डी. के. निवातिया

मैं और तू

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शीर्ष लोम से चरण नख तकएक तेरे ही नाम से बंधी हूँ मैंअंग अंग किया अर्पण तुझ परसौगंध के वचनों में सधी हूँ मैं !!!कोई पूछता है मेरा नाम पतानजर तेरी और झुका देती हूँ मैंमेरा मुझ में कुछ नही तेरे बिनसृष्टि में बस तेरे लिये बनी हूँ मैं !!!*!माना तेरा सब कुछ मेरा हैहर मोड़ पर मेरी पहचान है तू !कोख से लेकर शैय्या तकमेरी बनती रही सूत्रधार है तू !!!नादाँ है जो न समझे तुझकोसम्पूर्ण जीवन का सार है तूबिन तेरे ये जीवन यज्ञ अधूराजिंदगी के अचूक हर वार की, मेरे लिये बनी शशक्त ढाल है तू !!मेरा मुझ में कुछ नही तेरे बिन, मैं निर्जर शरीर और प्राण है तू !!!!!डी. के. निवातिया

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24 Comments

  1. babucm 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  2. Rakesh Aryan 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  3. ANU MAHESHWARI 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  4. Shishir "Madhukar" 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  5. Kajalsoni 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  6. sarvajit singh 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  7. Meena Bhardwaj 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  8. Shyam tiwari 03/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  9. mani 04/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  10. Madhu tiwari 05/04/2017
    • डी. के. निवातिया 10/04/2017
  11. Bhawana Kumari 19/07/2017
    • डी. के. निवातिया 19/07/2017

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