अंतिम यात्रा by Alok Upadhyay

किसी शायर ने अंतिम यात्राका क्या खूब वर्णन किया है…..था मैं नींद में और.मुझे इतनासजाया जा रहा था….बड़े प्यार सेमुझे नहलाया जा रहाथा….ना जानेथा वो कौन सा अजब खेलमेरे घरमें….बच्चो की तरह मुझेकंधे पर उठाया जा रहाथा….था पास मेरा हर अपनाउसवक़्त….फिर भी मैं हर किसी केमनसेभुलाया जा रहा था…जो कभी देखतेभी न थे मोहब्बत कीनिगाहोंसे….उनके दिल से भी प्यार मुझपरलुटाया जा रहा था…मालूम नही क्योंहैरान था हर कोई मुझेसोतेहुएदेख कर….जोर-जोर से रोकर मुझेजगाया जा रहा था…काँप उठीमेरी रूह वो मंज़रदेखकर…..जहाँ मुझे हमेशा केलिएसुलाया जा रहा था…..मोहब्बत कीइन्तहा थी जिन दिलों मेंमेरेलिए…..उन्हीं दिलों के हाथों,आज मैं जलाया जा रहा था!!!

Poet Alok Upadhyay With His Best Friend T.Veeru

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4 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  2. डी. के. निवातिया 01/04/2017
  3. babucm 01/04/2017
  4. Kajalsoni 01/04/2017

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