अधूरा ज्ञान – अनु महेश्वरी

यह सोच अच्छी भी है और सही भी,”ईश्वर जो करे होता है”।परंतु इसकी विवेचना कही कही,गलत हो जाती है, जैसे अगर कोई,हाथ पर हाथ धरे बैठने लग जाए,तब यह गलत साबित हो जाती है।दरअसल हम इस उपदेश का,व्याख्यान अगर इस तरह समझे,”कर्म तो हमें करना ही हैबस फल की चिंता हम न करे”,तब कोई समस्या नहीं रहेगी।समस्या यही है, हम पूरा न तोसुनते है, और न ही समझना चाहते है,बस ज्ञान बाँटने में लग जाते है।किसी भी बात का अधूरा ज्ञानअक्सर और भी भयंकर होता है।और अगर समझ भी गए हम,जीवन में खुद कम ही अपनाते है । अनु महेश्वरीचेन्नई

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    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  1. Meena Bhardwaj Meena Bhardwaj 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  2. Kajalsoni 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  4. C.M. Sharma babucm 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  5. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
  6. sarvajit singh sarvajit singh 01/04/2017
    • ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017

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