एक शिकायत

पता था मुझे दुनिया का तो, बस दुःख इसी बात का आया है की मुझे तू भी समझ ना पाया है… ख़ामोश परिंदा आज पहली बार चिलाया है, जिसे तू सुन ना पाया है…इस जालिम दिल ने भी ख़ूब रुलाया है,पर आँख ने आंसू तक न बहाया है…आज ये दिल शिकायत करने आया है,पर इसे तू समझ न पाया है… जब ये दोस्त तेरा तेरे पास आया है, उसी वक्त हवा के झोंके ने ऐसा कहर ढाया है,की तू पलकें उठा ना पाया है…तेरा दोस्त तेरी ही शिकायत लेके आया है,पर तू इसे समझ ना पाया है… तू जिसे अँधेरा समझे बैठा है,पागल वो मेरा ही परछायाँ है,आज ये फिर तुझसे  मिलने आया है..पर अफ़सोस तू इसे समझ ना पाया है.. ख़ैर जो भी हो मैं बड़ा ख़ुशनसीब हूँ ,जो तुझ जैसा दोस्त पाया है..बेसक तू ये सब समझ ना पाया है,पर याद है मुझे.. मैने हर खुशनुमा पल तुझ संग ही बिताया है…तेरे साथ ही तो ये लब खुल के मुस्काया है..आज शिकायत नही.. बस तुझ से मिलने तेरा दोस्त आया है…हाँ सिर्फ तुझसे मिलनेतेरा दोस्त आया है..

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14 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  2. C.M. Sharma babucm 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  3. Kajalsoni 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  4. mani mani 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  5. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  6. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 01/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 02/04/2017
  7. chandramohan kisku chandramohan kisku 03/04/2017
    • vinod sihag vinod sihag 05/04/2017

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