मीठी सरसता – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश ये दिल हर पल तरसता हैतेरी यादों में इन आँखों से हरदम जल बरसता हैमिले जो भी ज़माने में सब जन असली सयाने थेकिसी भी शख्स में ना तेरे जैसी मीठी सरसता हैतेरे आने से ही इस मुर्दा दिल में नई जान आई थीएक उजड़े चमन में फिर से कलियाँ मुस्कुराई थीमेरी खुशी इस ज़माने को जाने क्यों ना हुई मंजूरसभी ने साज़िशें कर हरदम दीप की लौ बुझाई थीशिशिर मधुकर

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14 Comments

    • Shishir "Madhukar" 28/03/2017
  1. ANU MAHESHWARI 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/03/2017
  2. babucm 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/03/2017
  3. Madhu tiwari 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/03/2017
  4. Meena Bhardwaj 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 28/03/2017
  5. डी. के. निवातिया 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/03/2017
  6. raquimali 28/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 30/03/2017

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