कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ…

कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँबिना वजह, कलम चला दिया करता हूँ लिख जाती है अक्सर,दिल में दबी बाते सारी जो खुद में रख खुदी भुला दिया करता हूँ ||यादकर उन बीते लम्हो को मुस्कुरा दिया करता हूँअक्सर कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ ||

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  2. C.M. Sharma babucm 27/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 27/03/2017
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/03/2017
  5. shivdutt 27/03/2017
  6. Kajalsoni 28/03/2017

Leave a Reply