कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ…

कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँबिना वजह, कलम चला दिया करता हूँ लिख जाती है अक्सर,दिल में दबी बाते सारी जो खुद में रख खुदी भुला दिया करता हूँ ||यादकर उन बीते लम्हो को मुस्कुरा दिया करता हूँअक्सर कुछ लिखकर, कुछ मिटा दिया करता हूँ ||

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6 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  2. babucm 27/03/2017
  3. Madhu tiwari 27/03/2017
  4. डी. के. निवातिया 27/03/2017
  5. shivdutt 27/03/2017
  6. Kajalsoni 28/03/2017

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