ICU की वह दिन और रात – अनु महेश्वरी

सुबह सुबह सीने के तीब्र दर्द नेमुझे ICU में पहुँचा दिया थान ही पास में मोबाइल थान ही अपना कोई साथ थान ही कुछ समझ आरहा थाबस अच्छा नहीं लग रहा थाअंदर एक बोर्ड पे लिखा था”please keep silence’चुप चाप ही थे मरीज तो सभीहल्ला उस बोर्ड के निचे बैठीसिस्टर्स ज़्यादा मचा रही थीशोर के बिच भी अजीब सासन्नाटा वहाँ पसरा हुआ थापास वाली मरीज बीच बीच मेंदर्द से कराह रही थी जोर जोर सेमैं आँखों को बंद करसोने की कोशिश कर रही थीबीच बीच में सिस्टर्स दवाया फिर कभी इंजेक्शनया कभी रक्तचाप नापनेके लिए मुझे जगा रही थीआँखें अब भारी होने लगी थीपर नींद आँखों से गायब थीसमय मानो थम सा गया थारुक गयी घड़ी की सुईया थीदिन है अभी भीया रात हो चुकीपता ही नहीं चल रहा थाबिटीया की याद आने लगी थीठीक से बात भी नहीं हो पायी थीकुछ समझ नहीं आरहा थापर मैंने हौसला नहीं खोया थाधीरे धीरे समय निकल रहा थादिन की तरह रात भी लम्बी थीपर जैसे तैसे समय बीत ही गया थासुबह वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया थाअब मैं अपनों के बिच आचुकी थीपता चला पतिदेव ने भी रात सारीICU के बाहर सीढ़ियों पे बैठ काटी थीपर अब सब कुछ ठीक थामोबाइल की घंटियालगातार बज रही थीअपने जो दूर थेउनके पास होने काएहसास करा रही थीहम दोनों के चेहरे पे हल्की सीमुस्कराहट अब लौट आयी थी।**(पिछले दिनों मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ की २४ घंटे मुझे ICU में बिताना पड़ा। अपने उसी अनुभब को चित्रित करने की कोशिश की है। ) अनु महेश्वरीचेन्नई

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14 Comments

  1. babucm 27/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  2. Madhu tiwari 27/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  3. डी. के. निवातिया 27/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  4. Meena Bhardwaj 27/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 27/03/2017
  5. Shishir "Madhukar" 27/03/2017
    • Anu Maheshwari 27/03/2017
  6. Kajalsoni 28/03/2017
  7. ANU MAHESHWARI 28/03/2017

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