खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थेजाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थेतुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता थाकई चेहरों के रूप रंग नई सुबह जितना निखरते थे कभी ऐसे भी क्षण आए तुम भावुक हो कर के रोईहम नज़दीक थे तो दर्द ए जिगर नित ना उभरते थे लाख कोशिश करी ज़माने ने तुमको बेचैन करने की वो जितना सताते हम दामन खुशी से उतना भरते थे कोई एहसान ना किया मधुकर ये फितरत हमारी थी मुहब्बत बाँटने वाले को हम खुदा जितना सिमरते थेशिशिर मधुकर

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16 Comments

  1. Madhu tiwari 26/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/03/2017
      • Madhu tiwari 27/03/2017
        • Shishir "Madhukar" 27/03/2017
  2. ANU MAHESHWARI 26/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/03/2017
  3. Kajalsoni 26/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" 26/03/2017
  5. babucm 26/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 26/03/2017
  6. डी. के. निवातिया 27/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2017
  7. Meena Bhardwaj 27/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 27/03/2017

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