हे माझी ! मेरे कर्णधार ! ….. भूपेन्द्र कुमार दवे

हे  माझी !  मेरे कर्णधार !मुझे ना छोड़ बीच मझधार। जिसको कहते जीवन नैय्यावह मैंने  तुमसे  पायी  हैतेरे  ही  कहने  पर  मैंनेलहरों  से  होड़ लगायी है माना किश्ती पर है मेरीपूर्वजन्म  का  भार अपारहे  माझी !  मेरे कर्णधार !मुझे ना छोड़ बीच मझधार। चहुँ ओर फेनिल सागर हैजीवन जिसमें बूँद जरा-साइसके  अंदर  घूम रहा हैकुंठित होकर जीव मरा-सा फूट पड़ा  तो मिट जावेगाइसका  यह सुन्दर आकारहे  माझी !  मेरे कर्णधार !मुझे ना छोड़ बीच मझधार। सोच  रहा था  तेरे रहतेथम जावेगी आँधी थककरऔर सफीना मेरा अनुपमपहुँच सकेगा तेरे तट पर पर  तूने  तो पहले से हीतोड़ फेंक दी चपल पतवारहे माझी  ! मेरे  कर्णधार !मुझे ना छोड़ बीच मझधार। आँसू  के   खारे  पानी  सेमन  का  मैलापन  धोने कोमैंने   पीड़ा  को  माँगा  थाकुछ दुख का अनुभव होने को पाल रहित नौका  करने कापर तुने किया विचित्र विचारहे  माझी !   मेरे कर्णधार !मुझे ना छोड़  बीच मझधार। अब तूफानों से कह भी दोकिश्ती तुमने तज डाली हैऔर  निराशा  मेरे मन मेंगहरी  तुमने  कर डाली है गर  तू मेरे कारण हताशतो  मैं तेरी वजह लाचारहे  माझी,  मेरे  कर्णधारमुझे ना छोड़ बीच मझधार।…..   भूपेन्द्र कुमार दवे00000 

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4 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 25/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/03/2017
  3. C.M. Sharma babucm 25/03/2017
  4. Kajalsoni 25/03/2017

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