खुद ही खुद में खोई मैं हूँ………

खुद ही खुद में खोई मैं रहूँ, क्यों जीवन को आयाम दिया |रक्त सींचकर मिट्टी को, इंसानों का जो नाम दिया ||मुझसे तुम उत्पन्न हुए, तब ढ़ोल – नगाड़े सब बाजे |मैंने खुद का ही रूप लिया, तो घोर निराशा क्यों साजे ||अँगड़ाई के आगोशो में, निर्वस्त्र दिखाई देती हूँ |जब भूख जगे कोई ना दिखे, मैं ही तब माँ भी होती हूँ ||हल – बैल तुम्हारे होते हैं, घर – बार तुम्हारा चलता है |सारे दुख मेरे हिस्से का, पर नाम तुम्हारा चलता है ||तुम हया मुझे सिखलाते हो, खुद अपनी छोड़े जाते हो |मैंने जीवन संग्राम किया, सर्वस्व तुम्हारे नाम किया ||ग़र हो पुरूषार्थ कहीं अन्दर, तो नारी का सम्मान करो |है कोठी कारी हीं तो सही, तुम दीपक सा इक बार जलो ||तब दसो दिशाएँ धरती की, फिर से धानी हो जाएंगी |पर अब कोई राम तभी होंगे, जब कौशल्या जीवित रह पाएंगी ||——————————————————धन्यवाद |आशीष कुमार झाधनबाद, झारखंड |मो. – 09534170632

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया 25/03/2017
    • Ashish Kumar Jha 25/03/2017
  2. Ashish Kumar Jha 25/03/2017
  3. Madhu tiwari 25/03/2017
  4. Kajalsoni 25/03/2017

Leave a Reply