तेरा रसमय गीत निमंत्रण ….. भूपेन्द्र कुमार दवे

तेरा रसमय गीत निमंत्रणमेरे प्राणों ने जब पायाप्राण पखेरू बन पीड़ा केयह कोमल गीत चुरा लाया।‘तुझसे मिलकर भेंट चढ़ानेअर्पित कर दूँ अनुपम माला’यही सोचकर गूँथी मैनेआँसू से गीतों की मालाबनी ना जब पंक्ति नूतन-सीकुछ भक्ति गुच्छ चुरा लायातेरा रसमय गीत निमंत्रणमेरे प्राणों ने जब पाया।प्राण पखेरू बन पीड़ा केयह कोमल गीत चुरा लाया।तेरे गीतों का स्वर पानेघुँघरू मिथ्या के सब तोड़ेऔर अहं की जंजीरें सारीमाया के बंधन भी छोड़ेनवपल्लव की झांझर ध्वनि कोमैं पवनदेव बन ले आयातेरा रसमय गीत निमंत्रणमेरे प्राणों ने जब पाया।प्राण पखेरू बन पीड़ा केयह कोमल गीत चुरा लाया।तेरी वीणा के सुर पानेतार साँस के सब छिन्न कियेमृत्यु-लोक से अमरलोक तकसभी अवरोध प्रच्छन्न कियेप्रिय मृदु बोल गगन के सारेमैं घन सावन बन ले आयातेरा रसमय गीत निमंत्रणमेरे प्राणों ने जब पाया।प्राण पखेरू बन पीड़ा केयह कोमल गीत चुरा लाया।तेरी सुमधुर लय को पानेविमुख हुआ जीवन लहरों सेश्रद्धा झोली भरी देखकरमौन हुआ अपने अधरों सेकूद पड़ा हूँ भवसागर मैंदेखो क्या क्या चुनकर लायातेरा रसमय गीत निमंत्रणमेरं प्राणों ने जब पाया।प्राण पखेरू बन पीड़ा केयह कोमल गीत चुरा लाया।….. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

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3 Comments

  1. Madhu tiwari 25/03/2017
  2. डी. के. निवातिया 25/03/2017
  3. babucm 25/03/2017

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