मेरे अंतः की आशायें…. भूपेन्द्र कुमार दवे

मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।मैं धूल बनूँ या फूल बनूँबिखराव तपन-सी रहती हैसुनसान अंधेरे पथ पर भीकुछ घड़कन दिल की बढ़ती है।पर आशा की लहरें तब भीचंचल मन में आ बसती हैं।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।तुमसे हटकर दूर चलूँ तोसफर विकट-सा बन जाता हैऔर अकेला निकल पडूँ तोपथ अनजाना बन जाता है।पर इन घड़ियों में भी आशातेरा रूप लिये रहती है।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।मैं तट पर जा लहरें गिनताभूल गया था साँसें गिननाक्रोध भरी जब आँधी आयीभूल गया मैं उठकर चलनापर चला-चली की आँधी मेंआशायें अल्हड़ रहती हैं।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।कब तक यह मधुऋतु प्यारीरूप रंग का श्रंगार करेगीऔ वसंत में भींगे तन मेंमहक साँस की भरा करेगीपर पतझर की थकी छाँव मेंआस बिचारी फिर भी रहती हैं।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।जब सुमनों से चुरा चुराकरकुछ पराग से प्राण भरूँ मैंफिर उर में विकसित वाणी मेंमन के सुर नादान भरूँ मैंतब जो गीत सजे जीवन केश्रंगार उसी से ये करती हैं।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।अंत समय साँसें थकने परबिखरे सपने और डरातेझुकती जाती उमर डरी-सीदाँत टूटते पग लँगड़ातेतब संघ्या की त्रस्त किरणेंकुछ आस किरण की रखती हैं।मेरे अंतः की आशायेंहरदम किलकारी भरती हैं।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

6 Comments

  1. ALKA ALKA 24/03/2017
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 24/03/2017
  3. Kajalsoni 24/03/2017
    • Kajalsoni 24/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/03/2017
  5. C.M. Sharma babucm 25/03/2017

Leave a Reply