एक कप चाय……. -प्रियंका ‘अलका’

 मैंमेरी उदासीऔर एक कप चाय……..ढलती हुई शामथमता हुआ शोरथकता हुआ मनऔर एक कप चाय……उलझे रिश्तेउलझे हालातबेबस सोचऔर एक कप चाय……….बंद मुट्ठी सेरेत का फिसलनापांवों के नीचे सेलहरों का बहनादेखते हीं देखतेउम्मीदों का बह जानाऔर सम्हालने के लिएबस एक कप चाय……..दुविधा की गठरीसाँसो में अटकीसन्नाटो की सिसकीकमरे में पसरीघड़ी की टिक-टिकन कुछ कहतीन सुनतीअपने ही धुन मेंबस बढ़ती जातीऔर……एक कोने में…..सब सुनती- समझतीमैंमेरी उदासीऔर एक कप चाय………..-अलका

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15 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  2. babucm 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  3. Madhu tiwari 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  4. डी. के. निवातिया 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  5. Kajalsoni 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  6. Meena Bhardwaj 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  7. ANU MAHESHWARI 24/03/2017
    • ALKA 27/03/2017
  8. Bindeshwar Prasad sharma 21/08/2017

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