मैं अक्सर भूल जाता हूँ।

जबसे दूर तू मुझसे हुआ है ऐ मेरे हमदम,
हर किसी बात में तेरा ज़िक्र आ ही जाता है;
सुनकर भी तुझको अनसुना कर देता हूँ मगर,
तेरा नाम मेरे मन की स्याही ढूढ़ ही लाता है;
फिर उस मन की स्याही से तेरी तस्वीर बनाता हूँ,
क्या करूँ,  तुझको याद नहीं करना मैं अक्सर भूल जाता हूँ।

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2 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017
  2. Kajalsoni 24/03/2017

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