तेरे ग़म को बांट लूं – अजय कुमार मल्लाह

तेरे ग़म को बांट लूं तो हासिल हो जाए जन्नत,मिले तु जो रब से मांग लूं तो पूरी हो जाए मन्नत,वक़्त भी थम कर कहे आ थाम ले तु हाथ इसका,क्यूं अकेला जी रहा है इंतज़ार है तुझे किसका।सख़्त हैं मेरी कोशिशें हासिल तुझे करने की ख़ातिर,दर्द है सीने में कितना कैसे करूँ ये बात ज़ाहिर,खुद-ब-खुद तु जान ले मै बयां नहीं कर पाऊँगा,न लौटी तु जो पास मेरे तो जीते जी मर जाऊँगा।मुश्किलें दीवार बनकर रोकेंगी कब तक रास्ता,चली आ तोड़कर के बंदिशें तुझे प्यार का है वास्ताहर घड़ी मेरी नज़र अब तलाशती तुझे रहे,परवाह नहीं करता किसी की भले ज़माना कुछ भी कहे।यक़ीन है मुझे प्यार पर एक दिन लौटकर तु आएगी,सच्ची मोहब्बत है मेरी कब तक तु मुझे तड़पाएगी,दिल की तड़प “करुणा” तु सुन तेरा नाम जपता मै फिरूँ,तेरे नाम को ही मै जिऊं तेरी सोच में ज़िन्दा रहूँ।

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14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 23/03/2017
  2. mani mani 23/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/03/2017
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 23/03/2017
  5. C.M. Sharma babucm 23/03/2017
  6. Kajalsoni 23/03/2017
  7. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 23/03/2017

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