बहनों को घर से दूर न होने दो

बहनों को घर से दूर न होने दो बेटियों बहनों को घर से दूर न होने दोसंपत्ति में हिस्सा कर सम्बंधों को विषाक्त मत होने दोहर अधिकार कानून दिला नहीं सकताप्रेम मान सम्मान बटवा नहीं सकताभाइयो में तो हम लड़ रहे हैबहनो  से मत लडवाओसमाज के ताने बने को तुम  समझोबुजुर्गो के बनाये नियम को समझोहमें भी चिंता रहती है, उनकी खुशहाली कीअपने से बड़े घर जाये, ऐसी ब्याह रचाने कीउन्हें ससुराल में हक मिल जाता हैसमाज का ऐसा ताना बना हैबेतिया घर की प्यारी होती हैघर की रोनक उन्ही से होती हैससुराल से आने पर घर में उल्लास होता हैतयोहारो सा मोहोल होता हैयह मोहोल बिगड़ने मत दोसम्पत्ति के खातिर विवाद छिड जायेगाफिर उन्हें ससुराल से कौन बुलाएगारक्षाबंधन में आस लगी रहती है दोनों ओरनहीं करो इन अरमानो को तोड़बच्चों को प्यारे है नाना नानी , मामा मामीइनसे नफरत हो जाएगी , कहाँ करेंगे मनमानीतुम अपना विवेक मत दिखलाओपाश्चात्य संस्कृति यहाँ मत लाओवह पूरी हिस्से की मालिक होती हैएक टुकड़ा दे उसे मत फुस्लायोतुम हित साधने चले हो, अहित कर जाओगेभाइयो के तो केस बहुत पड़े है अदालत मेंअब बहनों को न लाओ कटघरे मेंवह घर की लक्ष्मी होती है, घर घर पूजी जाती हैशादी विवाह  या जन्म दिन में उसकी अहम् भूमिका होती हैउनके बिना हर कम अधुरा, उनके बिना हर उल्लास अधुराजब बहने भी कहने लगेमुझे यहाँ कम मिला , मुझे वहां कम मिलातो क्या प्रेम सहज रह पायेगाफिर लक्ष्मी मूरत दिख पायेगीक्या अटूट बंधन रह जायेगाअरे सोचो और  विचार करोस्नेह का बंधन रह जाने दोसदियों की रीत का लंग्गन मत करो .

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6 Comments

  1. babucm 23/03/2017
  2. Shishir "Madhukar" 23/03/2017
  3. mani 23/03/2017
  4. Madhu tiwari 23/03/2017
  5. डी. के. निवातिया 23/03/2017
    • ANU MAHESHWARI 23/03/2017

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