खुशहाली की आशा

खुशहाली की आशा ———————- वह दिन कब आएगा ?जब सामने जो दिख रहा गगनचुम्बी ऊँची अट्टालिका के निचे ,पुआल की छज्जा पुआल की झोपडी में सोहराय महीना की जाड़ा में जब माँ की गोद से उतारकर ठंडी हरे घास पर गला फाड़कर रोती है छोटा बच्चा। फिर भी अट्टालिकाओं में रहनेवालों का नींद टूटता नहीं है। वही बच्चा ही बड़ा और युवा होकर मन में स्वप्न देखता है टूटा छप्पर मिटटी का घर को बनाएगा ऊंचा अट्टालिका। वह दिन कब आएगा ?जब सोहराय पर्व की आनंद पांच दिन और पांच रात के लिए नहीं पुरे साल भर के लिए होगा। वह दिन कब आएगा ?जब समाज की सभी बच्चे बड़ा और युवा होकर समाज में खुशहाली और शांति का साकवा बजायेगा। ———- चंद्र मोहन किस्कु ——————————————————————————————-सोहराय महीना =ठंड मौसम को ही संताल आदिवासी सोहराय महीना कहते है सोहराय पर्व =संताल आदिवासियों का सबसे बड़ा पर्व साकवा =संताल आदिवासियों का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र।

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  1. C.M. Sharma babucm 23/03/2017
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2017

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