भाव-2 – प्रियंका ‘अलका’

 कभी-कभी मन के भावपानी से भरेउस काले बादल के समानहो जाते हैंजिसका पानीसीप की मुँह में जाकरबहुमूल्य मोती कानिर्माण कर सकता हैकिंतुजाने किस विवशता में फँसावो बरस नहीं पाताकेवल गरजता रह जाता हैऔर खाली सीपखाली हीं रह जाती है………..जाने आज मन कीक्या विवशता हैअंदर हीं अंदरभाव गरज रहे हैंपर शब्द बनकागज पर उतरने कोतैयार नहीं…..शायद -कुछ भाव बादल मेंकैद रहने के लिए हींबनते हैं……भाव हैं न….कौन जानेबरसने के बादमोती बने या बाढ़…….-अलका

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13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  2. babucm 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  3. डी. के. निवातिया 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  4. ANU MAHESHWARI 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  5. Kajalsoni 22/03/2017
    • ALKA 23/03/2017
  6. Meena Bhardwaj 23/03/2017
    • ALKA 23/03/2017
  7. Bindeshwar Prasad sharma 21/08/2017

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