सपनों का बोझ – प्रियंका ‘अलका’

हम दोनों जानते हैंएक होने के बाद भीहम दोनों के सपने अलग हैं…….कहते हैं -खाना धीमी आँच पर पकाने सेखाना अच्छा पकता है ।मैं तुम्हारे सपनों को समझती हूँपर तुमने मेरेसपने के अस्तित्व कोझूठला दिया है……तुम अपने सपनों कोमेरी आँखों से देखने कीहड़बड़ी में रहते हो,मैं तुम्हारे सपनों सेपीछा छुड़ाने कीजल्दी में रहती हूँ……अब मुझे यह कहने कीजरूरत नहींहमारे रिश्ते की जल्दबाजीहमारे रिश्ते कोकैसा पका रही है………….-अलका

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19 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 21/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  2. Madhu tiwari 21/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  3. babucm 21/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  4. mani 21/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  5. डी. के. निवातिया 21/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  6. ANU MAHESHWARI 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  7. Kajalsoni 22/03/2017
    • ALKA 22/03/2017
  8. Meena Bhardwaj 23/03/2017
  9. ALKA 23/03/2017
  10. Bindeshwar Prasad sharma 21/08/2017

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