हर पल सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम सजते संवरते थेजाने मन जान लो हम तुम से कितना प्यार करते थेतुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता थाहमारे चेहरे के हाव भाव भी ती खुलकर निखरते थे कभी ऐसे भी क्षण आए तुम भावुक हो कर के रोईहमने अँजुली में सम्भाले जितने भी आँसू झरते थेलाख कोशिश करी दुनिया ने तुमको बेचैन करने कीमगर हम तो तेरा दामन हरदम खुशियों से भरते थेकोई अहसान ना था इसमें ये फितरत ही थी मधुकर मुहब्बत देने वाले शख्सो को हम हर पल सिमरते थेशिशिर मधुकर

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20 Comments

  1. babucm 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  2. Kajalsoni 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  3. Madhu tiwari 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  4. राकेश पांडेय 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  5. mani 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  6. MANOJ KUMAR 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  7. डी. के. निवातिया 21/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 21/03/2017
  8. ALKA 22/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 22/03/2017
  9. Meena Bhardwaj 23/03/2017
    • Shishir "Madhukar" 23/03/2017

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