फिर चल पड़ा हूँ मैं..

फिर चल पड़ा हूँ मैं उस तरफकहते हैं लोग जिधर बाधाएं बहुत हैं,अब उनको कहाँ मालुम किबाधाएं पार पाना मेरी फ़ितरत में हैऔर हार न मानना मेरी आदत |फिर चल पड़ा हूँ मैं उस तरफकहते हैं लोग जिधर बाधाएं बहुत हैं,पर उस ज़ुनून की उनको कहाँ खबरजिसने हमें हौसला दे देकरपरिपक्वता का दामन पकड़ा दिया है |चलता रहूंगा अनवरत तबतक -जब तक मंजिल ना मिले, बाधाएं कैसे हौसला पस्त करेंगीजब इऱादों को संग लेकरपरिस्थितियों के आकलन की आदत रहेगी |राकेश

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6 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 20/03/2017
    • राकेश पांडेय 20/03/2017
  2. Kajalsoni 20/03/2017
    • राकेश पांडेय 20/03/2017
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/03/2017
    • राकेश पांडेय 20/03/2017

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